खोफ

खुदिको बुलंद कर करके
अब पुरा थकसा गया हूं,
ना मेरी परेशानिया रुकती है
‌न तो खुदा मेरी रझा पुछता है.

‌हर शक्स यंहा उलझा है
‌मैं कौनसा बडा रुस्तम हूं,
तवज्जू तक नही चाहता
इतना मैं नाचीज हूं.

नजर करता हूं हर शेर, 
खुदिको  बडे अकेलेमे,
मुझसे बेहेतर, और कौन
जानता मुझे, बडे अकेलेमे.

क्यों किसे खुशी दू,
अपने गम बाटके,
रहने दे वहम
बचे दिन काटके.


-किशोर पांडे
२  जुलै २०२०













Comments

  1. गुफ़्तगु अपने आपसे. सही है

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    1. थँक्स अविकाका
      नवजात पहिल्या वहिल्या प्रयत्नांना प्रोत्साहन, उत्साहित झालो.

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