शायरी

युंही नही करते, इनायत वफासे,
मुकर न जाना,   अगली दफासे.

खोई हुई  चांदनी भी कभी मिलती नही,
युनूस पे जुनुन हो,  तो राह  चलती नही.

लीख तो जाता हूँ,  पर समझ नहीं पाता,
वालीद की दुआ है, कोई रोक नही पाता.

कलाम  मेरे  कभी, न  आप आजमाना,
कुछ समझ आए, तो मुझे भी बतलाना.


किशोर पांडे
२२, जुलै २०२०




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