करोना

काटने लगी है जिंदगी, काटते काटते हर लम्हां
महसुस होने लगे सिकुडके,  और तनहा तनहा


गुजरना है जो भी, गुजरके रहेगी
रहमत भी तो फिर भी, बरसती रहेगी

 
इस मसलेका का भला, क्यो खोफ़ हो दिलमे
जब मुसीबीतोमे पुरी जिंदगी, गुजारी है हमने

क्या बिगाडा है  अबतक, जो अब बिगाड लेंगे
रख भरोसा मालिकपर, हम सब महफूजही रहेंगे

जश्नका दिन जल्द ही आयेगा
गीत खुषीका हर दील गाएगा  

किशोर पांडे
१५ जुलै २०२०


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